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आये कुछ अब्र कुछ शराब आये
उसके बाद आये जो अज़ाब आये

बाम-ए-मीना से माहताब उतरे
दस्त-ए-साक़ी में आफताब आये

हर रग-ए-खून में फिर चरागां हो
सामने फिर वो बेनक़ाब आये

कर रहा था ग़म-ए-जहां का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आये

जल उठे बज़्म-ए-ग़ैर के दामन
जब भी हम खानुमां खराब आये

फ़ैज़ की राह सरबसर मंज़िल
हम जहाँ पहुंचे कामयाब आये

 

 

 

 

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